कोर्ट का आदेश दिलों के सामने सिर्फ एक कागज का टुकरा है

 ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️


                     राधिका और नवीन को आज तलाक के पेपर मिल गए थे ! दोनों साथ ही कोर्ट से बाहर निकले दोनों के परिजन साथ थे ! उनके चेहरे पर विजय और सुकून के निशान साफ झलक रहे थे ! 

4 साल की लंबी लड़ाई के बाद आज फैसला हो गया था ,!

10 साल हो गए थे शादी के !

मगर 6 साल ही साथ में रह पाए थे !

4 साल तो तलाक की कार्रवाई में लग गए राधिका के साथ में दहेज के सामान की लिस्ट थी ! जो अभी नवीन के घर से लेना था ! और नवीन के हाथ में गहने का लिस्ट था ! जो राधिका से लेने थे  ! 

साथ में यह कोर्ट का आदेश भी था कि नवीन 1000000 रुपए की राशि एकमुश्त राधिका को चुकाए गा ! 

 राधिका और नवीन एक ही टेंपो में बैठकर नवीन के घर पहुंचे दहेज में दिए सामान की निशानदेही राधिका को ही करनी थी ! इसलिए 4 वर्ष बाद ससुराल जा रही थी ! 

आखरी बार बस उसके बाद कभी नहीं जाना था उधर !

सभी परिजन अपने अपने घर जा चुके थे !

 बस 3 प्राणी बचे थे नवीन राधिका और राधिका की माताजी नवीन घर में अकेला ही रहता था ! मां बाप और भाई आज भी गांव में ही रहते हैं ! 

राधिका और नवीन का एकलौता बेटा जो अभी 7 साल का है कोर्ट के फैसले के अनुसार बालिक होने तक वह राधिका के पास ही रहेगा !

 नवीन महीने में एक बार उसे मिल सकता है ! राधिका का घर में प्रवेश करते ही पुरानी यादें ताजा हो गई कितनी मेहनत से सजाया था ! इसको राधिका ने !

 एक एक चीज में उसकी जान बसी थी सब कुछ उसे के आंखों के सामने बना था ! एक-एक ईंट से धीरे-धीरे घरों को पूरा होते देखा था  !

उसने सपनों का घर था और उसका ! 

नवीन थका हारा सा सोफे पर पसर गया बोला ले लो जो कुछ भी चाहिए मैं तुझे नहीं रोकूंगा !

 राधिका ने अब गौर से नवीन को देखा 4 साल में कितना बदल गया है ! बालों में सफेदी झांकने लगी है ! शरीर पहले से ही आधा रह गया है! 4 साल में चेहरे की रौनक गायब हो गई है! वह स्टोर रूम की तरफ बरी जहां उसके दहेज का अधिकतर सामान पड़ा था !

सामान ओल्ड फैशन का था ! इसीलिए कावार की तरह स्टोर रूम में डाल दिया था ! डाल दिया था !

मिला भी कितना था उसको दहेज में प्रेम विवाह था दोनों का घरवाले तो मजबूरी में साथ हुए थे !

प्रेम विवाह था तभी तो नजर लग गई किसी की क्योंकि प्रेमी जूरी को हर कोई टूटता हुआ देखना चाहता है ! 

बस एक बार पीकर बहक गया था नवीन हाथ उठा बैठा था उस पर बस वह गुस्से से मायके चली गई 

फिर चला था लडाने सीखाने का दौर इधर नवीन के भाई भाभी और उधर राधिका की मां !नौबत कोर्ट तक जा पहुंची और तलाक हो गया !

ना राधिका लौटी ना नवीन लाने गया राधिका की मां बोली कहां है तेरा सामान ?

 इधर तो नहीं दिखता बेच दिया होगा इस शराबी ने ?

"चुप रहो मां "

राधिका को ना जाने क्यों नवीन को उसके मुंह पर शराबी कहना अच्छा नहीं लगा ! फिर से स्टोर रूम में जाकर सामान को एक-एक करके लिस्ट में मिलाया गया बाकी कमरों से भी लिस्ट का सामान उठा लिया गया राधिका ने सिर्फ अपना सामान लिया नवीन का सामान को छुआ तक नहीं !

फिर राधिका ने नवीन को गहने से भरा बैग पकड़ा दिया !

नवीन ने बैग वापस राधिका को दे दिया ! 

रख लो मुझे नहीं चाहिए काम आएंगे तेरे मुसीबत में गहने की कीमत 1500000 से कम नहीं थी! 

 जो कोर्ट में तो तुम्हारा वकील कितनी दफा गहने गहने चिल्ला रहा था! 

 कोर्ट की बात कोर्ट में खत्म हो गई है राधिका ! वहा तो मुझे भी दुनिया का सबसे बड़ा जानवर शराबी साबित किया गया है! सुनकर राधिका की मां ने नाक भी चढ़ई  ! 

नहीं चाहिए वह 1000000 दसलाख भी 

नवीन शोफे से खड़ा हो गया ! कियू! 

 बस यूं ही राधिका ने मुंह फेर लिया ! 

इतनी बड़ी जिंदगी है कैसे काटोगे ले जाओ काम आएगा इतना कहकर नवीन ने मुंह फेर लिया ! और दूसरे कमरे में चला गया शायद आंखों में कुछ आसूं होगा ! जीसे छुपाना भी जरूरी था! राधिका की माता जी गाड़ी वाले को फोन करने में व्यस्त थी ! राधिका को मौका मिल गया वह नवीन के पीछे उसके कमरे में चली गई वह रो रहा था अजीब सा मुंह बनाकर जिसे भीतर के सैलाब को दबाने की जद्दोजहद कर रहा हो राधिका ने उसे कभी रोते हुए नहीं देखा था ! आज पहली बार देखा ना जाने दिल को क्यों सुकून सा मिला !

मगर ज्यादा भावुक नहीं हुई !

सधे अंदाज में बोली इतनी फिक्र थी तो क्यों दिया था तलाक ! मैंने नहीं तालाक तुमने दिया था !

 दस्तखत तो तुम भी किए ?

 माफी नहीं मांग सकते थे ?

मौका कब दिया तुम्हारे घर वाले ने जब भी फोन किया काट दिया !

 घर भी आ सकते थे ?

हिम्मत नहीं थी ? 

राधिका की मां आ गई वह राधिका का हाथ पकड़कर बाहर ले गई अब क्या मुंह लग रही हो इसके ! अब तो रिश्ता भी खत्म हो गया है !  मां बेटी बाहर बरामदे में सोफे पर बैठ कर गाड़ी का इंतजार करने लगी ! 

राधिका के भीतर से कुछ टूट रहा था ! दिल बैठा जा रहा था वह सुन सी परी जा रही थी ! जिस सोफे पर बैठी थी उसे गौर से देखने लगी !

 कैसे-कैसे बचत करके उसने नवीन ने वह सोफा खरीदा था पूरे शहर में घूमी तब यह सोफा पसंद आया था ! फिर उसकी नजर सामने तुलसी के सूखे पौधे पर गई कितनी शिद्दत से देखभाल किया करती थी ! उसके साथ तुलसी भी घर छोड़ गई !

घबराहट और बड़ी तो फिर उठकर भीतर चली गई मां पीछे पुकारा मगर वह अनसुना कर दिया नवीन बेड पर उल्टे मुंह परा था ! एक बार तो उसे दया आई उस पर मगर वह जानती थी कि अब तो सब कुछ खत्म हो चुका है ! 

इसलिए उसे भावुक नहीं होना है उसने सरसरी नजर में कमरे को देखा अस्त-व्यस्त हो गया है पूरा कमरा कहीं-कहीं मकड़ी के जाले झूला झूल रहे हैं कितनी नफरत थी उसे मकड़ी के जाल से फिर उसी नजर चारों ओर गई फोटो पर गई जिसमे वह नवीन से लिपट कर मुस्कुरा रही थी !

कितने सुनहरे दिन थे ! वह इतने में मां फिर आ गई हाथ पकड़ कर फिर से बाहर ले गई ! बाहर गाड़ी आ गई थी ! 

सामान गाड़ी में डाला जा रहा था ! राधिका सुनसी  बैठी थी नवीन गाड़ी की आवाज सुनकर बाहर आ गया ! 

अचानक नवीन कान पकड़ कर घुटनों के बल बैठ गया ? 

बोला मत जाओ माफ कर दो !

शायद यही वह शब्द थे !

 जिन्हें सुनने के लिए 4 साल मैं तड़प रही थी !

सब्र के सारे बांध एक साथ टूट गए ! 

राधिका ने कोर्ट के फैसले का कागज निकाला और फाड़ दिया! मां कुछ कहती उससे पहले लिपट गई नवीन से साथ में !

 दोनों बुरी तरह रोते जा रहे थे ! दूर खड़ी राधिका की मा समझ गई !

 के कोट का आदेश दिलों के सामने कागज से ज्यादा कुछ नहीं है !

काश उनको पहले मिलने दिया होता ?

अगर माफी मांगने से रिश्ते टूटने से बच जाए तो माफी मांग लेनी चाहिए !

         🙏🙏🙏🙏  धन्यवाद🙏🙏🙏🙏






टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

लोकप्रिय पोस्ट