कौन है फातमा इंडस्ट्री का मलिक
.कौन है फातमा इंडस्ट्री का मालिक ?
किस ने खड़ा किया इतना बड़ा एंपायर ?
कहां से लाया होगा इतना पैसा ?
कहां से मिला होगा यह नॉलेज ?
यह सारा सवाल पूछ रहे थे ?
फातमा इंडस्ट्री के बाहर खड़े गेटमैन से ?
💆💇
यह वह लड़की है जिसका बचपन काफी कठिनाई से गुजरा है इसके पिता जी के पास इनको खिलाने पिलाने की
यानी कि एक अच्छा सा ड्रेस दिलाने का रुपया नहीं था।
बचपन में इस लड़की के पास चप्पल तक नहीं थे । दिसंबर जनवरी की ठंडी में चप्पल पहनती थी । एक दूसरा एक दूसरा और चप्पल की फ़िता की जगह रस्सी बंधी होती थी ।
मीट मछली खाने का को तरस जाते थे । इसके पास अपना कोई घर नहीं था ।
इनकी दादाजी को मिला था । सरकार के तरफ से
इंदिरा आवास । जो सिर्फ ईंट बालू से बना था । उसमें एक भी पिलर नहीं थे ।
अगर कोई ताकतवर इंसान धक्का मार दे तो दिवाल टूट भी सकता था । उस पर टीन हुआ करता था ।
और जब भी बारिश होती थी तो बाहर से ज्यादा घर के अंदर पानी होता था । और पूरा परिवार कहीं एक कोने में जमा हो जाते थे । और बारिश खत्म होने का इंतजार करते थे ।
और जब बारिश खत्म हो जाता था । तो सब मिलकर घर में भरे पानी को साफ करते थे ।
उस समय यह लड़की पापा से बोलती थी । कि पापा फला के पापा छत वाला घर बनाया है । फला का पापा छत वाला घर बनाया है । आप कब छत वाला घर बनाएंगे ?
यह बातें सुनकर के पापा का दिल में बहुत दुख होता था । लेकिन उस समय समझाते के बेटा अपना घर बहुत बड़ा शानदार बिल्कुल 5* स्टार की तरह होगा ।
जो यहां किसी का ऐसा घर नहीं होगा । हमारे घर में वह सारा फैसिलिटी होगा जो 5* स्टार में होता है ।
हम बहुत खुशियों भरी जिंदगी जिएंगे । हमारा घर ईतना बड़ा होगा कि बहुत ऐसे बे सहारे लोग भी इसमें रहेंगे ।
जिसका इस दुनिया में कोई नहीं होगा हम उसका मदद करेंगे ।
ड्रेस
दूसरे बच्चे को अच्छे ड्रेस में देखते ही और पापा से बोलती थी । की फला की बेटी कितना अच्छा ड्रेस पहनी है ?
पापा की आंख नम हो जाते थे । और बेटी को समझाता बेटा यह ड्रेस तो कुछ भी नहीं है ।
आप जो ड्रेस पहनेगी इस इलाके में कोई नहीं पहन सकती है। बस कुछ दिन और तकलीफ है । उसके बाद तो इस तरह का ड्रेस आप खुद बे सहारे यतीम बच्चे को दान करेंग ।
क्योंकि बहुत बड़ा इंडस्ट्री होगा आपका इंडस्ट्री की मालिक रहेगी आप ।
आपके नाम से इंडस्ट्री चलेगा ।
बच्ची फिर खुश हो जाती थी।
मेला
एक बार तो हद हो गई । गांव के सारे बच्चे मेला जा रहे थे। यह भी जिद करने लगी । और काफी समझाने के बाद नहीं मानी ।
तो मम्मी के पास के केवल ₹18 थे । उनको दे दिया और यह गांव के बच्चे के साथ मेला घूमने चली गई ।
और मेला में बहुत कुछ देखने लगी इधर खिलौने की दुकान पर खिलौना देखती और लेने की बहुत ही इच्छा होती थी ।
जैसे ही दुकानदार बोलता है कि बेटा यह तो ₹40 का है खिलौने को रख देती और वहां से चली जाती थी ।
उधर मिठाई की दुकान की तरफ जाती जलेबी वाले से पूछती जलेबी कैसे दिया दुकानदार बोलता कि ₹25 का पाव।
फिर देखते कि मेरे पास तो केवल ₹18 ही हैं वहां से मन को छोटा करके चली जाती पूरा मेला घूमती रहे और देखती रही मन को मार कर सभी बच्चे कुछ कुछ लेती लेकिन यह सिर्फ देख कर आगे निकल जाती थी ।
वापस आने का समय हुआ तो सोची के घर में छोटे छोटे भाई बहन हैं। तो उनके लिए ₹10 का मूंगफली ली और ₹5 का पापड़ ले ली ।
सभी बच्चे का प्लान हुआ कि जाते जाते एक बार झूला में भी चला जाए ।
लेकिन इनके पास केवल वह ₹3 बचे थे जो मेला में ₹3 का कुछ भी नहीं मिलता था ।
झूले का टिकट था ₹10 यह बाहर खड़ी देखती रही ।
सभी बच्चे झूला का इंजॉय कर रहे थे ।
उसके बाद वापस आते सभी बच्चे उनका मजाक उड़ाने लगे क्या है इनके पास कुछ भी नहीं है कितना रुपए लेकर आई थी सब इनका मजाक उड़ाने लगे ।
यह सारी बातें सुनकर वह सभी बच्चे के पीछे पीछे आ रही थी। और यह सारी बातें मम्मी पापा को सुनाया सबकी आंखें नम हो गई।
फिर से पापा ने समझा है कि बेटा टेंशन मत लो आज गांव का छोटा सा मेला था । एक दिन आएगा कि आपको कूरूज पर दुनिया की सैर कराएंगे डिज्नीलैंड घुमाएगे फिर बच्चे को समझा दिया ।
भुखा
कई बार तो ऐसा हुआ कि घर में खाने के लिए कुछ नहीं था। फिर किसी तरह उनके नाना को पता चला।
फिर नाना ने टैंपू में चावल दाल सब्जी आटा तेल यानी कि सभी खाने का सामान पहुंचा ।
साईकिल
एक बार लड़की जिद करने लगी के पापा फला के पापा ने उसे साइकिल दिलाया मुझे भी दिलाओ ।
पापा ने समझाया बेटा दिलाऊंगा भरोसा रख खुदा पर आपके पास साइकिल ही नहीं
RANGE ROVER CAR
से चलेंगे आप.!
शिक्षा
एक दिन तो यह पढ़ने के लिए काफी जिद करने लगी कि। सभी बच्चे ट्यूशन पढ़ने जाते हैं हमारा भी नाम लिखवा दो। लेकिन रुपया नहीं होने के कारण एडमिशन नहीं कर पाए। इनके पापा ।
और यह लड़की ट्यूशन पढ़ने के लिए चल्दी ।
के पापा का नाम बोल दूंगी टीचर को मैं परूंगी ।
लेकिन हालात कुछ ऐसा था कि एडमिशन तो दूर की बात शाम को खाने में क्या बनेगा वह भी रुपया नहीं था ।
बच्चे को समझाने लगे मम्मी लेकिन नहीं मानी कोचिंग की तरफ रवाना हो गई । इसकी मम्मी आधे रास्ते से पकड़ कर वापस लाई।
मां बेटी दोनों रोते जा रही थी बेटी रो रही थी। कि उसे पढ़ने जाने नहीं दिया ।
मां रो रही थी कि हालात पर बच्चे को पढ़ाने से वापस घर ले जाना पड़ता था ।
घर में आकर मम्मी पापा बहुत रोए अपनी इस हालात पर ।
डॉक्टर
एक दिन ऐसा हुआ कि उनके छोटे भाई जो काफी बीमार था। घर में पैसे नहीं थे केवल ₹20 था ।
₹20 लेकर डॉक्टर के पास गए लेकिन डॉक्टर ने दवा देकर वापस ले लिया ,? कि बगैर नहीं देंगे दवाई और वापस कर दिया ऐसी हालात में गुजरी है । यह फातमा इंडस्ट्री के मालिक। और उनके मम्मी पापा ।
दुवा से तकदीर बदलती हैं
तन्हई में जाकर रोते ? खुदा को याद करते कि।
मैंने बच्चे को जो सपना दिखाया या खुदा है। इस को जल्दी से जल्दी पूरा कर दें।
ताकि बच्चा कल यह ना कहें कि पापा झूठ बोले थे या अल्लाह बच्चे के सामने मेरी इज्जत बचाना।
यह सब बच्चों का नहीं पता है कि पापा के पास रुपया नहीं है या अल्लाह जिंदगी में परिवर्तन ला दे इन बच्चों की जिंदगी खुशियों से भर दे।
यह सारी दुआएं मांगते हमेशा मेहनत करते कुछ नया रास्ता ढूंढते ।
खुदा ने रास्ता दिया तकदीर को चमका दिया।
जिंदगी को बदल दिया गम को खुशी में बदल दिया । उनके पापा के बोले हुए वह हर बात सही साबित हुआ ।
जो इस बेटी का वास्ता देकर खुदा से मांगते थे ।
और आज नजारा आपके सामने है ।
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या अल्लाह तेरा लाख लाख शुक्र है
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धन्यवाद
आपका प्यारा दोस्त ( RAZA)
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